नई दिल्ली नागरिकों के बीच जागरुकता बढ़ाकर और स्वच्छता सुविधाओं की उपलब्धता में लगातार सुधार करके, स्वच्छ भारत मिशन-शहरी का पहला चरण लक्ष्य हासिल करने में सफल रहा और 100 प्रतिशत शहरी भारत को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया गया। एसबीएम-यू 2.0 का उद्देश्य शहरी भारत को कचरा मुक्त बनाना और ओडीएफ से आगे बढ़ना था। पिछले आठ वर्षों में मिशन ने स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन में क्रांति लाने के लिए कथा बदल दी है और अनगिनत नागरिकों के व्यवहार में बदलाव लाने में सफल रहा है। स्वच्छ भारत मिशन-शहरी का दूसरा चरण एक जन आंदोलन बन गया और बड़ी संख्या में नागरिकों को संगठित करने और इसमें शामिल करने में मदद मिली। यह सतत विकास लक्ष्य 2030 की उपलब्धि में योगदान देने के साथ-साथ भारत के तेजी से शहरीकरण की चुनौतियों को प्रभावी ढंग से संबोधित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
इस यात्रा को आगे बढ़ाते हुए, मिशन 3500 से अधिक शहरों को ओडीएफ प्लस और 1100 से अधिक शहरों को ओडीएफ प्लस प्लस प्रमाणित किया गया है। 14 शहरों को वाटर प्लस प्रमाणित किया गया है, जिसमें अपशिष्ट जल का उपचार और इसका अधिकतम पुन: उपयोग शामिल है। शहरों के लिए गार्बेज फ्री स्टार रेटिंग में 234 शहर 1-स्टार रेटिंग वाले, 199 शहर 3-स्टार रेटिंग वाले और 11 शहर 5-स्टार रेटिंग वाले हैं। वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन पर जोर दिया जाना इस बात से स्पष्ट है कि भारत में अपशिष्ट प्रसंस्करण 2014 में 18 प्रतिशत से चार गुना बढ़कर आज 76 फीसदी हो गया है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि मिशन स्वच्छता कार्यकर्ताओं, अनौपचारिक कचरा श्रमिकों और सफाई मित्रों के जीवन में उल्लेखनीय बदलाव लाने में सक्षम रहा है।
आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (एमओएचयूए) ने देश भर में स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2.0 की योजना और कार्यान्वयन के पैमाने का मूल्यांकन और तेजी लाने के लिए एक दिवसीय समीक्षा-सह-कार्यशाला का आयोजन किया।
इसमें 35 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के प्रमुख सचिव शहरी विकास और नगरपालिका प्रशासन, नौ मेगापोलिस (बृहन्नगर) के नगर निगमों के आयुक्त, राज्य मिशन निदेशक, सेक्टर भागीदार, आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के विकास भागीदार और अन्य उपस्थित थे।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने एसबीएम के पहले चरण की उपलब्धियों को स्वीकार किया और जन आंदोलन को इस शानदार सफलता का श्रेय दिया। इससे व्यवहार में महत्वपूर्ण बदलाव आया। केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि एसबीएम शहरी का दूसरा चरण, वैज्ञानिक ठोस अपशिष्ट और प्रयुक्त जल प्रबंधन के माध्यम से कचरा मुक्त शहरों के दृष्टिकोण को साकार करना चाहता है। उन्होंने कहा कि योजना और अनुमोदन प्रक्रियाओं में तेजी लाते हुए, 22 राज्यों के लिए 50 प्रतिशत से अधिक आवंटन को केवल दूसरे वर्ष में मंजूरी दी गई है।
उन्होंने राज्यों के साथ बातचीत करते हुए कहा कि चल रहे स्वच्छ सर्वेक्षण के दौरान वह जमीनी स्तर पर स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने के लिए उत्सुक हैं। केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि सभी शहरों को 2026 तक 3-स्टार कचरा-मुक्त रेटिंग हासिल करनी चाहिए और इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य के लिए नियमित योजना, निगरानी, मूल्यांकन और सुधारात्मक उपायों के कार्यान्वयन के माध्यम से त्वरित प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि समीक्षा-सह-कार्यशाला ने विभिन्न राज्यों के अनुभवों को सीखने और साझा करने के लिए एक बेहतर मंच प्रदान किया है।
केन्द्रीय मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने उत्कृष्टता केंद्र, इंदौर में प्रशिक्षण कार्यक्रम, स्वच्छता नॉलेज पार्टनर्स डायरेक्टरी और स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 टूलकिट के शुभारंभ की घोषणा करते हुए कहा कि इससे सहयोग और ज्ञान साझा करने को बढ़ावा मिलेगा।
आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव श्री मनोज जोशी ने भाग लेने वाले राज्यों को संबोधित करते हुए लीगेसी अपशिष्ट निवारण, अपशिष्ट प्रसंस्करण, प्रयुक्त जल प्रबंधन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में शहरों की जबरदस्त पहल और अथक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा, “ हम यहां चर्चा कर रहे हैं कि भविष्य में क्या काम करने की जरूरत है। ”